rohit saah ki story 🤯!
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बिहार के नालंदा जिले में स्थित बिहार शरीफ के पुलपर इलाके में जन्मे रोहित साह की कहानी केवल उनका सफर नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। एक आम परिवार से आने वाले रोहित के पिता श्री बलदेव प्रसाद एक बैंक में कार्यरत थे और माँ रेखा देवी एक गृहिणी थीं। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनका जीवन भी सपनों, जिम्मेदारियों और संघर्षों से भरा था।
पिता का समर्पण और माँ की ममता
"एक पिता का संघर्ष तब तक खत्म नहीं होता जब तक उसके बच्चों का भविष्य सुरक्षित न हो जाए।"
रोहित के पिता ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत की। एक बैंक कर्मी होते हुए भी उन्होंने हर संभव कोशिश की कि उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न आए। "एक पिता का कर्तव्य सिर्फ पैसे कमाना नहीं, बल्कि अपने बच्चों को सही दिशा दिखाना होता है।"
वहीं, माँ रेखा देवी ने हर परिस्थिति में अपने परिवार को एक धागे की तरह बाँधकर रखा। उनकी ममता और त्याग ने इस परिवार को टूटने नहीं दिया। "माँ का प्यार वह शक्ति है, जो किसी भी कठिन परिस्थिति में एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी रहती है।"
बड़े भाइयों का त्याग और संघर्ष
"सफलता का असली मतलब तब होता है जब आप अपनी मेहनत से न सिर्फ खुद आगे बढ़ें, बल्कि अपने परिवार को भी ऊँचाइयों तक ले जाएँ।"
सबसे बड़े भाई राहुल राज ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खुद के पैरों पर खड़े होने की ठानी। उन्होंने "राज टेलीकॉम" नाम की मोबाइल शॉप खोली और अपनी पढ़ाई की फीस खुद भरनी शुरू की। यह उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता का पहला कदम था। कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ, उन्होंने एयरफोर्स में मेडिकल असिस्टेंट के रूप में चयन प्राप्त किया।
"एक बड़ा भाई हमेशा अपने छोटे भाई-बहनों के लिए एक प्रेरणा होता है।"
दूसरे भाई रजत राज ने भी अपने परिवार की ज़िम्मेदारी समझते हुए धनबाद कोल माइंस में नौकरी कर ली। उन्होंने अपने छोटे भाई और बहन की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उनके समर्पण ने पूरे परिवार को एक नई दिशा दी।
राहुल का पिता के प्रति कर्तव्य
"एक सफल बेटा वह नहीं होता जो सिर्फ खुद कमाता है, बल्कि वह होता है जो अपने माता-पिता की इच्छाओं को पूरा करता है।"
राहुल ने अपने पिता के संघर्ष को देखा और महसूस किया कि अब उसे अपने पिता के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने अपनी मेहनत से पैसे बचाए और रांची में पिता के लिए एक छोटा सा घर गिफ्ट किया। साथ ही, माँ के लिए दालटनगंज में भी एक घर लिया।
"एक बेटा जब अपने पिता के संघर्ष का सम्मान करता है, तब वह असली सफलता प्राप्त करता है।"
रोहित का आत्मनिर्भर बनने का सफर
"जो गिरकर उठता है, वही असली योद्धा होता है।"
छोटे बेटे रोहित साह ने भी अपनी जिम्मेदारियों को समझा और मुंबई की एक कंपनी में काम करना शुरू किया। शुरुआत में चुनौतियाँ थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग और सॉफ्टवेयर में महारत हासिल की और डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर की पोस्ट तक पहुँच गए।
"सपने उन्हीं के सच होते हैं, जो उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।"
आज की खुशहाली
"संघर्ष से सीखी गई सीख ही इंसान को सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाती है।"
अब पूरा परिवार सुखी और संतुष्ट जीवन जी रहा है:
✅ बड़ा बेटा रजत राज – बिजली निगम में कार्यरत है और अपनी मेहनत से परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहा है।
✅ दूसरा बेटा राहुल राज – कानपुर एयरफोर्स स्टेशन में तैनात है और अपने सेवा भाव से देश के वीर जवानों की रक्षा और सेवा कर रहा है।
✅ सबसे छोटा बेटा रोहित साह – मुंबई में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर रहा है और साथ ही अपने परिवार के लिए एक सफल व्यवसाय भी चला रहा है।
"संघर्ष का रास्ता कठिन जरूर होता है, लेकिन जो इस पर चलते हैं, वही अपने सपनों को हकीकत में बदल पाते हैं।"
आज परिवार के सभी सदस्य मेहनत और समर्पण की बदौलत अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं और माता-पिता को गर्व का अहसास करवा रहे हैं। 💫
संघर्ष से मिली सीख
इस परिवार ने जीवन में कई दुख-दर्द देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उनके संघर्ष ने उन्हें मजबूत बनाया और आज वे सफलता की ऊँचाइयों पर हैं।
"अगर जीवन में संघर्ष है, तो समझ लो कि सफलता भी तुम्हारी राह देख रही है। बस मेहनत करते जाओ, बिना रुके, बिना झुके!"
– रोहित साह की प्रेरणादायक कहानी उन सभी के लिए सबक है, जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं और उन्हें पूरा करने का जज़्बा भी।
AGAR APP BHI APNI AISEI HI LIFE KI STORY DUNIYA KO BATANA CAHATE HAI TO HUME APP MASSGE KARE HUM APKI STORY' DUNIYA TAK PANUCHYENGE _____!
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