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गरीबों को खाना खिलाना एक बहुत ही पुण्य का काम है। इस कहानी में हम रोहित की कहानी सुनेंगे, जिसने अपनी निस्वार्थ सेवा से बहुतों का दिल जीता।
रोहित रांची में रहता था। वह एक साधारण छात्र था, पर उसकी सोच और दिल बहुत बड़े थे। रोहित का मानना था कि असली खुशी दूसरों की सेवा में है। उसके परिवार में उसके माता-पिता, बड़ा भाई राहुल और बड़ी बहन रिया थे। राहुल सेना में फौजी था, और रिया एक IPS अधिकारी थी।

हर सुबह रोहित स्कूल जाने से पहले अपने छोटे से बगीचे में कड़ी मेहनत करता और सब्जियाँ उगाता। उसके भाई राहुल और बहन रिया ने हमेशा रोहित को सिखाया था कि सच्ची देशभक्ति का मतलब अपने लोगों की सेवा करना भी है। रोहित ने अपने भाई और बहन की बातों को दिल से लगाया और हर सप्ताह अपने शहर के गरीब और भूखे लोगों के लिए भोजन का आयोजन करने का फैसला किया।

रोहित के पास ज्यादा पैसा नहीं था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। वह अपने बगीचे की सब्जियों का एक हिस्सा हर सप्ताह अलग रखता और उससे खाना बनाता। धीरे-धीरे मोहल्ले के लोग भी उसकी इस पहल में शामिल हो गए। कोई सब्जियाँ लाता, तो कोई मसाले, और इस तरह हर सप्ताह एक बड़ा भोज आयोजित होता।

एक दिन रांची में एक बड़ी विपत्ति आई। भयंकर बारिश और तूफान ने शहर की फसलों और घरों को नष्ट कर दिया। लोग परेशान और भूखे थे। रोहित ने हार नहीं मानी। उसने अपने बगीचे की बची हुई सब्जियों को इकट्ठा किया और मोहल्ले वालों की मदद से भोजन तैयार किया। उसने अपने दिल की गहराई से प्रार्थना की और कहा, "भगवान, हमें शक्ति देना ताकि हम दूसरों की मदद कर सकें।"

उस दिन रोहित ने पूरे मोहल्ले को भोजन कराया। लोग उसकी सेवा भाव से बहुत प्रभावित हुए। धीरे-धीरे रोहित का काम अन्य मोहल्लों और इलाकों में भी फैलने लगा। लोग उसकी कहानी सुनकर प्रेरित हुए और उन्होंने भी गरीबों और भूखों की सेवा शुरू की।

जब राहुल छुट्टी पर घर आया और उसने रोहित की सेवा के बारे में सुना, तो वह बहुत गर्व महसूस कर रहा था। उसने रोहित को गले लगाते हुए कहा, "तुमने साबित कर दिया कि सच्चा योद्धा सिर्फ सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपने शहर में भी हो सकता है।"

रिया भी अपने भाई की सेवा भावना से प्रेरित हुई और उसने अपने पुलिस विभाग के सहयोगियों के साथ मिलकर गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का आयोजन शुरू किया। 
रोहित की कहानी हमें यह सिखाती है कि यदि हमारे दिल में सेवा और मदद का भाव हो, तो हम किसी भी परिस्थिति में दूसरों की मदद कर सकते हैं। रोहित का नाम अब पूरे इलाके में आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उसकी निस्वार्थ सेवा ने यह साबित कर दिया कि असली महानता दूसरों की सेवा में है।

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