रांची की रात और एक उम्मीद की लौ – राष्ट्रपति महोदया से मेरी विनती" 💪
prernaatmak kahani likhi gayi hai jo aapki baat ko madam president Draupadi Murmu tak pahunchane ke jazbe ko dikhati hai. Yeh kahani sachchai, samvedana aur badlav ki pukar hai:



ब्लॉग शीर्षक: "रांची की रात और एक उम्मीद की लौ – राष्ट्रपति महोदया से मेरी विनती"
हर शहर की एक अलग पहचान होती है—कहीं रफ्तार, कहीं रौशनी, और कहीं खामोशी। लेकिन मेरा शहर रांची, जो अब "स्मार्ट सिटी" कहलाने लगा है, उसकी रातें आज भी दर्द से भरी हैं।
मैं रोहित साह हूं, एक सामान्य नागरिक, लेकिन दिल में असामान्य दर्द और जिम्मेदारी लिए। मैं कोई राजनेता नहीं, कोई बड़ा अधिकारी भी नहीं। लेकिन उस रात के बाद से मैं सिर्फ एक इंसान नहीं रहा—मैं बन गया हूं एक आवाज़।
वो रात...
मेरे परिवार में अचानक एक मेडिकल इमरजेंसी आ गई। बुखार, उल्टी और घबराहट। मैं दौड़ा—पहले पास के मेडिकल स्टोर की तरफ, पर सब बंद। फिर दूसरे, तीसरे... लेकिन पूरे शहर में RIMS और Sadar के अलावा कोई मेडिकल स्टोर नहीं खुला। रतु से RIMS तक का सफर, अकेले, रात के सन्नाटे में, एक खामोश डर के साथ।
ना कोई ऑटो, ना कोई पुलिस, और ना ही कोई इंसान जिससे मदद मांगी जा सके।
रांची की रातें स्मार्ट नहीं हैं...
एक सवाल बार-बार मन में उठा—"अगर पार्टी के लिए रात में सब कुछ मिल सकता है, तो ज़िंदगी बचाने वाली दवा क्यों नहीं?"
हमारे देश की जनता टैक्स देती है, कानून का पालन करती है, लेकिन जब ज़रूरत होती है, तो क्या सरकार हमारी ज़रूरतों का पालन करती है?
राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मू जी से मेरी बिनती...
आपने देश को बदलने की एक मिसाल कायम की है। आप झारखंड की माटी से उठकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचीं। आपकी संघर्षभरी यात्रा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।
आज एक बेटा, एक भाई, और एक जागरूक नागरिक होने के नाते, मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि:
रांची और झारखंड के हर कोने में 24 घंटे खुले मेडिकल स्टोर की व्यवस्था हो।
हर ब्लॉक स्तर पर एक ऐसा अस्पताल हो, जहां आपातकालीन सेवाएं हर वक्त उपलब्ध हों।
रात में पेट्रोलिंग और ट्रांसपोर्ट की सुविधा बेहतर हो, ताकि कोई अकेले डर में सफर न करे।
मैं चाहता हूं कि किसी मां का बेटा, किसी बहन का भाई, किसी पिता की संतान सिर्फ इसलिए न जाए, क्योंकि उसे वक्त पर दवा नहीं मिल पाई।
मैं रोहित साह हूं – एक आम आदमी, लेकिन अपने शहर के लिए एक जिम्मेदार सिपाही। और ये मेरी नहीं, हजारों-लाखों लोगों की आवाज़ है।
सेवा परमो धर्मः – यही मेरा धर्म है।
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