#rohitsaah
“ज़िंदगी की भागदौड़ में इंसान अक्सर बहुत अकेला हो जाता है,
पैसे कमाने की चाह में वो अपनों को ही पीछे छोड़ देता है।”
“कभी-कभी हम इतना कमाने में लग जाते हैं,
कि जीना ही भूल जाते हैं।”
“जेब में पैसे बढ़ते जाते हैं,
पर साथ बैठकर हँसने वाले लोग कम होते जाते हैं।”
“इंसान सपनों के पीछे भागते-भागते,
अपनों से ही दूर हो जाता है।”
“अजीब है ये जिंदगी…
जब समय होता है तो पैसे नहीं होते,
और जब पैसे होते हैं तो समय नहीं होता।”
“पैसा कमाने में पूरी उम्र निकल जाती है,
और आखिर में समझ आता है कि
सबसे कीमती चीज़ तो रिश्ते थे।”
“थोड़ा वक्त अपनों के लिए भी निकाल लिया करो,
क्योंकि गुज़रा हुआ समय
कभी वापस नहीं आता।”
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