rohit saah


🙏🙏🙏🙏🙏Ye poem ap sabhi logo ko syd pasd aye nd gys agar ye poem pasand aye to plz app mujhe follwe kijyega   thankyouuuuuu 🙏🙏🙏🙏

***********.  पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए ।😔😔पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए ।😔😔

दुध पिलाया जिसने छाती से निचोड़करमैं "निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका । 😭
बुढापे का "सहारा,, हूँ "अहसास" दिला न सकापेट पर सुलाने वाली को "मखमल, पर सुला न सका । 😭
वो "भूखी, सो गई "बहू, के "डर, से एकबार मांगकरमैं "सुकुन,, के "दो, निवाले उसे खिला न सका ।😭
नजरें उन "बुढी, "आंखों से कभी मिला न सका ।वो "दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका । 😔
जो हर "जीवनभर" "ममता, के रंग पहनाती रही मुझेउसे "दिवाली  पर दो "जोड़ी, कपडे सिला न सका । 😭
"बिमार बिस्तर से उसे "शिफा, दिला न सका ।"खर्च के डर से उसे बड़े अस्पताल, ले जा न सका । 😔
"माँ" के बेटा कहकर "दम,तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,"दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका । 😭
माँ तो माँ होती हे भाईयों माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे तो उसे उसका "Duaa" समझकर भूला देना चाहिए|✨

💙💖दुध पिलाया जिसने छाती से निचोड़करमैं "निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका । 😭
बुढापे का "सहारा,, हूँ "अहसास" दिला न सकापेट पर सुलाने वाली को "मखमल, पर सुला न सका । 😭
वो "भूखी, सो गई "बहू, के "डर, से एकबार मांगकरमैं "सुकुन,, के "दो, निवाले उसे खिला न सका ।😭
नजरें उन "बुढी, "आंखों से कभी मिला न सका ।वो "दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका । 😔
जो हर "जीवनभर" "ममता, के रंग पहनाती रही मुझेउसे "दिवाली  पर दो "जोड़ी, कपडे सिला न सका । 😭
"बिमार बिस्तर से उसे "शिफा, दिला न सका ।"खर्च के डर से उसे बड़े अस्पताल, ले जा न सका । 😔
"माँ" के बेटा कहकर "दम,तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,"दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका । 😭
माँ तो माँ होती हे भाईयों माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे तो उसे उसका "Duaa" समझकर भूला देना चाहिए|✨

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